
भजन संहिता 24
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 24 घोषणा करता है कि संपूर्ण संसार परमेश्वर की संपत्ति है, पूछता है कि कौन शुद्ध हाथों और सच्चे हृदय से चढ़ सकता है, और प्राचीन द्वारों को एक भव्य जुलूस के माध्यम से महिमामय राजा का स्वागत करने के लिए बुलाता है।
सृष्टिनिष्ठाउपासनामहिमा
1पृथ्वी और जो कुछ उसमें है यहोवा ही का है; जगत और उसमें निवास करनेवाले भी।
2क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी24:2 उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी: जैसे पृथ्वी जल से घिरी प्रतीत होती है तो उसे जल पर नींव डालकर दृढ़ रखने की अभिव्यक्ति स्वाभाविक है।, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है।
3यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्रस्थान में कौन खड़ा हो सकता है?
4जिसके काम निर्दोष24:4 जिसके काम निर्दोष: अर्थात् जो खरा है। हृदय शुद्ध है अर्थात् बाहरी आचरण ही खरा न हो उसका मन भी शुद्ध हो। और हृदय शुद्ध है, जिसने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है।
5वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करनेवाले परमेश्वर की ओर से धर्मी ठहरेगा।
6ऐसे ही लोग उसके खोजी है, वे तेरे दर्शन के खोजी याकूबवंशी हैं। (सेला)
7हे फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो! हे सनातन के द्वारों, ऊँचे हो जाओ! क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा।
8वह प्रतापी राजा कौन है? यहोवा जो सामर्थी और पराक्रमी है, परमेश्वर जो युद्ध में पराक्रमी है!
9हे फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो हे सनातन के द्वारों तुम भी खुल जाओ! क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा!
10वह प्रतापी राजा कौन है? सेनाओं का यहोवा, वही प्रतापी राजा है। (सेला)
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