
भजन संहिता 25
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 25 भरोसे, निर्देशन, क्षमा, वाचा मित्रता, और अकेलेपन को आपस में गूंथता है। शिक्षा ग्रहण करने वालों को अच्छे मार्गों पर ले जाया जाता है जबकि शत्रु और छिपे जाल ईमानदारी व नम्रता से भरोसे की प्रार्थना में लाए जाते हैं।
निर्देशनक्षमावाचाभरोसा
1हे यहोवा, मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूँ।
2हे मेरे परमेश्वर, मैंने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएँ।
3वरन् जितने तेरी बाट जोहते हैं उनमें से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे।
4हे यहोवा, अपने मार्ग मुझ को दिखा; अपना पथ मुझे बता दे।
5मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करनेवाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूँ।
6हे यहोवा, अपनी दया और करुणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं।
7हे यहोवा, अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर25:7 मेरी जवानी के .... स्मरण न कर: परमेश्वर की प्रबल विषमता में भजनकार अपना ही आचरण एवं जीवन सामने रखता है।; अपनी करुणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।
8यहोवा भला और सीधा है; इसलिए वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
9वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हाँ, वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
10जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करुणा और सच्चाई हैं। (यूह. 1:17)
11हे यहोवा, अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।
12वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? प्रभु उसको उसी मार्ग पर जिससे वह प्रसन्न होता है चलाएगा।
13वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा।
14यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उससे डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा। (इफि. 1:9, इफि. 1:18)
15मेरी आँखें सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पाँवों को जाल में से छुड़ाएगा25:15 मेरे पाँवों को जाल में से छुड़ाएगा: जाल, दुष्ट ने उसके लिए बिछाया है। वह केवल परमेश्वर पर भरोसा रखता है कि उसे उससे बचाए।। (भज. 141:8)
16हे यहोवा, मेरी ओर फिरकर मुझ पर दया कर; क्योंकि मैं अकेला और पीड़ित हूँ।
17मेरे हृदय का क्लेश बढ़ गया है, तू मुझ को मेरे दुःखों से छुड़ा ले25:17 तू मुझ को मेरे दुःखों से छुड़ा ले: पापों के सदृश्य, और चारों ओर के संकटों से। बाहरी कष्ट और आन्तरिक अपराध बोध दोनों से छुड़ा ले।
18तू मेरे दुःख और कष्ट पर दृष्टि कर, और मेरे सब पापों को क्षमा कर।
19मेरे शत्रुओं को देख कि वे कैसे बढ़ गए हैं, और मुझसे बड़ा बैर रखते हैं।
20मेरे प्राण की रक्षा कर, और मुझे छुड़ा; मुझे लज्जित न होने दे, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूँ।
21खराई और सिधाई मुझे सुरक्षित रखे, क्योंकि मुझे तेरी ही आशा है।
22हे परमेश्वर इस्राएल को उसके सारे संकटों से छुड़ा ले।
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