Judean families grieve beneath willows with unused harps while Babylonian officials request a song

भजन संहिता 137

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 137 निर्वासितों के शोक, सांस्कृतिक दबाव, तीव्र स्मृति, और बेबीलोन की नदियों के किनारे अनसुलझे क्रोध को संरक्षित करता है। मौन की गई वीणाएं पवित्र गीत को मनोरंजन में बदलने से इनकार को प्रकट करती हैं जबकि यरूशलेम खोई हुई परन्तु अविस्मृत पड़ी है।
निर्वासनसिय्योनशोकस्मृति
1बाबेल की नदियों के किनारे हम लोग बैठ गए, और सिय्योन को स्मरण करके रो पड़े!
2उसके बीच के मजनू वृक्षों पर हमने अपनी वीणाओं को टाँग दिया;
3क्योंकि जो हमको बन्दी बनाकर ले गए थे, उन्होंने वहाँ हम से गीत गवाना चाहा, और हमारे रुलाने वालों ने हम से आनन्द चाहकर कहा, “सिय्योन के गीतों में से हमारे लिये कोई गीत गाओ!”
4हम यहोवा के गीत को, पराए देश में कैसे गाएँ?
5हे यरूशलेम, यदि मैं तुझे भूल जाऊँ, तो मेरा दाहिना हाथ सूख जाए!
6यदि मैं तुझे स्मरण न रखूँ, यदि मैं यरूशलेम को, अपने सब आनन्द से श्रेष्ठ न जानूँ, तो मेरी जीभ तालू से चिपट जाए!
7हे यहोवा, यरूशलेम के गिराए जाने के दिन को एदोमियों के विरुद्ध स्मरण कर, कि वे कैसे कहते थे, “ढाओ! उसको नींव से ढा दो!”
8हे बाबेल, तू जो जल्द उजड़नेवाली है, क्या ही धन्य वह होगा, जो तुझ से ऐसा बर्ताव करेगा137:8 क्या ही धन्य वह होगा, जो तुझ से ऐसा बर्ताव करेगा: अर्थात् जो ऐसे अपराधी एवं निर्दयी नगर को दण्ड देने का साधन बनाया जाए, वह एक सौभाग्यशाली मनुष्य होने का सम्मान पाएगा। जैसा तूने हम से किया है! (प्रका. 18:6)
9क्या ही धन्य वह होगा, जो तेरे बच्चों को पकड़कर, चट्टान पर पटक देगा! (यशा. 13:16)

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.

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