A family embraces children at a building site while workers and city watchmen pause to pray

भजन संहिता 127

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 127 निर्माण, रखवाली, कार्य, और परिवार पालने में चिंतित आत्मनिर्भरता को चुनौती देता है। मानवीय प्रयास महत्वपूर्ण है, फिर भी स्थायी सुरक्षा और विरासत केवल बेचैन संघर्ष से उत्पन्न उपलब्धियां नहीं बल्कि प्राप्त उपहार हैं।
घरानाकार्यबच्चेभरोसा
1यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनानेवालों का परिश्रम व्यर्थ होगा। यदि नगर की रक्षा यहोवा न करे, तो रखवाले का जागना व्यर्थ ही होगा।
2तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और कठोर परिश्रम की रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद प्रदान करता है।
3देखो, बच्चे यहोवा के दिए हुए भाग हैं127:3 बच्चे यहोवा के दिए हुए भाग हैं: वे प्रकृति की ओर से परमेश्वर की भक्ति का प्रतिफल हैं वे परमेश्वर की प्रतिज्ञा के अनुसार आशीषें हैं।, गर्भ का फल उसकी ओर से प्रतिफल है।
4जैसे वीर के हाथ में तीर, वैसे ही जवानी के बच्चे होते हैं।
5क्या ही धन्य है वह पुरुष जिसने अपने तरकश को उनसे भर लिया हो! वह फाटक के पास अपने शत्रुओं से बातें करते संकोच न करेगा।

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.

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