
भजन संहिता 101
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 101 एक शासक को प्रस्तुत करता है जो घर और सार्वजनिक रूप से निष्ठा का अभ्यास करने के लिए दृढ़ है। छल, निंदा, अहंकार, और भ्रष्टाचार का कोई स्वागत नहीं है, जबकि विश्वासयोग्य लोग विश्वसनीय सेवा का स्थान पाते हैं।
निष्ठानेतृत्वन्यायविश्वासयोग्यता
1मैं करुणा और न्याय के विषय गाऊँगा; हे यहोवा, मैं तेरा ही भजन गाऊँगा।
2मैं बुद्धिमानी से खरे मार्ग में चलूँगा। तू मेरे पास कब आएगा? मैं अपने घर में मन की खराई के साथ अपनी चाल चलूँगा;
3मैं किसी ओछे काम पर चित्त न लगाऊँगा101:3 मैं किसी ओछे काम पर चित्त न लगाऊँगा: ओछे काम से अभिप्राय है, निकम्मे, बुरे, दुष्टता के काम। उसका लक्ष्य दुष्टता का नहीं है वह पल भर के लिए भी दुष्टता के काम को नहीं देखेगा।। मैं कुमार्ग पर चलनेवालों के काम से घिन रखता हूँ; ऐसे काम में मैं न लगूँगा।
4टेढ़ा स्वभाव मुझसे दूर रहेगा; मैं बुराई को जानूँगा भी नहीं।
5जो छिपकर अपने पड़ोसी की चुगली खाए, उसका मैं सत्यानाश करूँगा101:5 उसका मैं सत्यानाश करूँगा: अर्थात् मैं उसे अपने से अलग कर दूँगा; मैं उसके साथ काम नहीं करूँगा। ऐसे किसी को भी वह घर में या सेवा में नहीं रखेगा।; जिसकी आँखें चढ़ी हों और जिसका मन घमण्डी है, उसकी मैं न सहूँगा।
6मेरी आँखें देश के विश्वासयोग्य लोगों पर लगी रहेंगी कि वे मेरे संग रहें; जो खरे मार्ग पर चलता है वही मेरा सेवक होगा।
7जो छल करता है वह मेरे घर के भीतर न रहने पाएगा; जो झूठ बोलता है वह मेरे सामने बना न रहेगा।
8प्रति भोर, मैं देश के सब दुष्टों का सत्यानाश किया करूँगा, ताकि यहोवा के नगर के सब अनर्थकारियों को नाश करूँ।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.
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