A falsely accused fugitive watches elders weigh testimony beside an abandoned bow and pit

भजन संहिता 7

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 7 पीछा से बचाव मांगता है जबकि ईमानदार आत्म-परीक्षण को भी आमंत्रित करता है। न्याय उस हिंसा को उजागर करता है जो अपने बनाने वाले पर वापस लौटती है, निर्दोष को सुरक्षित शरण और कृतज्ञ स्तुति का कारण देते हुए।
न्यायशरणनिर्दोषताआत्म-परीक्षण
1हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं तुझ में शरण लेता हूँ; सब पीछा करनेवालों से मुझे बचा और छुटकारा दे,
2ऐसा न हो कि वे मुझ को सिंह के समान फाड़कर टुकड़े-टुकड़े कर डालें; और कोई मेरा छुड़ानेवाला न हो।
3हे मेरे परमेश्वर यहोवा, यदि मैंने यह किया हो, यदि मेरे हाथों से कुटिल काम हुआ हो,
4यदि मैंने अपने मेल रखनेवालों से भलाई के बदले बुराई की हो, या मैंने उसको जो अकारण मेरा बैरी था लूटा है
5तो शत्रु मेरे प्राण का पीछा करके मुझे आ पकड़े7:5 तो शत्रु मेरे प्राण का पीछा करके मुझे आ पकड़े: यदि उस पर लगाए गए दोष सही है, और वह अपराधी ठहरा तो वह दण्ड के लिए तैयार है।, और मेरे प्राण को भूमि पर रौंदे, और मुझे अपमानित करके मिट्टी में मिला दे। (सेला)
6हे यहोवा अपने क्रोध में उठ; क्रोध से भरे मेरे सतानेवाले के विरुद्ध तू खड़ा हो जा; मेरे लिये जाग! तूने न्याय की आज्ञा दे दी है।
7देश-देश के लोग तेरे चारों ओर इकट्ठे हुए है; तू फिर से उनके ऊपर विराजमान हो।
8यहोवा जाति-जाति का न्याय करता है; यहोवा मेरी धार्मिकता और खराई के अनुसार मेरा न्याय चुका दे।
9भला हो कि दुष्टों की बुराई का अन्त हो जाए, परन्तु धर्मी को तू स्थिर कर; क्योंकि धर्मी परमेश्वर मन और मर्म का ज्ञाता है।
10मेरी ढाल परमेश्वर के हाथ में है, वह सीधे मनवालों को बचाता है।
11परमेश्वर धर्मी और न्यायी है7:11 परमेश्वर धर्मी और न्यायी है: जैसे वह एक न्यायपूर्ण निर्णय सुनाता है, वह उनके चरित्र की पुष्टि करता है।, वरन् ऐसा परमेश्वर है जो प्रतिदिन क्रोध करता है।
12यदि मनुष्य मन न फिराए तो वह अपनी तलवार पर सान चढ़ाएगा; और युद्ध के लिए अपना धनुष तैयार करेगा। (लूका 13:3-5)
13और उस मनुष्य के लिये उसने मृत्यु के हथियार तैयार कर लिए हैं7:13 उसने मृत्यु के हथियार तैयार कर लिए हैं: उन्हें मृत्यु देने के साधन अर्थात् उन्हें दण्डित करेगा।: वह अपने तीरों को अग्निबाण बनाता है।
14देख दुष्ट को अनर्थ काम की पीड़ाएँ हो रही हैं, उसको उत्पात का गर्भ है, और उससे झूठ का जन्म हुआ।
15उसने गड्ढे खोदकर उसे गहरा किया, और जो खाई उसने बनाई थी उसमें वह आप ही गिरा।
16उसका उत्पात पलटकर उसी के सिर पर पड़ेगा; और उसका उपद्रव उसी के माथे पर पड़ेगा।
17मैं यहोवा के धर्म के अनुसार उसका धन्यवाद करूँगा, और परमप्रधान यहोवा के नाम का भजन गाऊँगा।

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