
भजन संहिता 4
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 4 व्यथा, क्रोध और व्यर्थ खोज को ईमानदार संध्या प्रार्थना में लाता है। भजनकार भौतिक बहुतायत से गहरा आनंद खोजता है और परमेश्वर की सुरक्षात्मक देखभाल में स्थिर भरोसे से सुरक्षित लेट जाता है।
संध्या प्रार्थनाभरोसाशांतिआनंद
1हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूँ तब तू मुझे उत्तर दे; जब मैं संकट में पड़ा तब तूने मुझे सहारा दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले।
2हे मनुष्यों, कब तक मेरी महिमा का अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे? (सेला)
3यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है4:3 यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है: अपने उद्देश्यों के निमित या अपनी योजना के लिए।; जब मैं यहोवा को पुकारूँगा तब वह सुन लेगा।
4काँपते रहो और पाप मत करो; अपने-अपने बिछौने पर मन ही मन में ध्यान करो और चुपचाप रहो। (सेला) (इफि. 4:26)
5धार्मिकता के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो।
6बहुत से हैं जो कहते हैं, “कौन हमको कुछ भलाई दिखाएगा?” हे यहोवा, तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका!
7तूने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उनको अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता है।
8मैं शान्ति से लेट जाऊँगा और सो जाऊँगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को निश्चिन्त रहने देता है।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.
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