
भजन संहिता 28
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 28 अनुत्तरित मौन से डरता है और छलपूर्ण दुष्टों का भाग्य साझा न करने की विनती करता है। जब शक्ति, सुरक्षा, और संपूर्ण लोगों के लिए चरवाहे जैसी देखभाल निश्चित हो जाती है तो विनती धन्यवाद में बदल जाती है।
विनतीशक्तिसुरक्षास्तुति
1हे यहोवा, मैं तुझी को पुकारूँगा; हे मेरी चट्टान, मेरी पुकार अनसुनी न कर, ऐसा न हो कि तेरे चुप रहने से मैं कब्र में पड़े हुओं के समान हो जाऊँ जो पाताल में चले जाते हैं28:1 जो पाताल में चले जाते हैं: मृतकों के सदृश्य तनाव और निराशा से ग्रस्त होकर मर जाऊँ।।
2जब मैं तेरी दुहाई दूँ, और तेरे पवित्रस्थान की भीतरी कोठरी की ओर अपने हाथ उठाऊँ, तब मेरी गिड़गिड़ाहट की बात सुन ले।
3उन दुष्टों और अनर्थकारियों के संग मुझे न घसीट; जो अपने पड़ोसियों से बातें तो मेल की बोलते हैं, परन्तु हृदय में बुराई रखते हैं।
4उनके कामों के और उनकी करनी की बुराई के अनुसार उनसे बर्ताव कर, उनके हाथों के काम के अनुसार उन्हें बदला दे; उनके कामों का पलटा उन्हें दे। (मत्ती 16:27, प्रका. 18:6,13, प्रका. 22:12)
5क्योंकि वे यहोवा के कामों को और उसके हाथ के कामों को नहीं समझते, इसलिए वह उन्हें पछाड़ेगा और फिर न उठाएगा28:5 फिर न उठाएगा: परमेश्वर उन पर अनुग्रह नहीं करेगा, वह उन्हें समृद्धि प्रदान नहीं करेगा।।
6यहोवा धन्य है; क्योंकि उसने मेरी गिड़गिड़ाहट को सुना है।
7यहोवा मेरा बल और मेरी ढाल है; उस पर भरोसा रखने से मेरे मन को सहायता मिली है; इसलिए मेरा हृदय प्रफुल्लित है; और मैं गीत गाकर उसका धन्यवाद करूँगा।
8यहोवा अपने लोगों की सामर्थ्य है, वह अपने अभिषिक्त के लिये उद्धार का दृढ़ गढ़ है।
9हे यहोवा अपनी प्रजा का उद्धार कर, और अपने निज भाग के लोगों को आशीष दे; और उनकी चरवाही कर और सदैव उन्हें सम्भाले रह।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.
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