
भजन संहिता 113
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 113 स्तुति को सूर्योदय से सूर्यास्त तक और स्वर्ग की ऊंचाइयों से समाज के सबसे निचले स्थानों तक फैलाता है। गरीब गरिमा पाते हैं, दरिद्र सम्मानित संगति साझा करते हैं, और एक निःसंतान स्त्री परिवार में आनंदित होती है।
स्तुतिगरिमागरीबपरिवार
1यहोवा की स्तुति करो! हे यहोवा के दासों, स्तुति करो, यहोवा के नाम की स्तुति करो!
2यहोवा का नाम अब से लेकर सर्वदा तक धन्य कहा जाएँ!
3उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक, यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है।
4यहोवा सारी जातियों के ऊपर महान है, और उसकी महिमा आकाश से भी ऊँची है।
5हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कौन है? वह तो ऊँचे पर विराजमान है,
6और आकाश और पृथ्वी पर, दृष्टि करने के लिये झुकता है।
7वह कंगाल को मिट्टी पर से, और दरिद्र को घूरे पर से उठाकर ऊँचा करता है113:7 वह कंगाल को मिट्टी पर से, .... उठाकर ऊँचा करता है: जीवन की तुच्छ अवस्था से वह उन्हें धन-सम्पदा और पद-प्रतिष्ठा में ले आता है।,
8कि उसको प्रधानों के संग, अर्थात् अपनी प्रजा के प्रधानों के संग बैठाए। (अय्यू. 36:7)
9वह बाँझ को घर में बाल-बच्चों की आनन्द करनेवाली माता बनाता है। यहोवा की स्तुति करो!
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.
Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Supplied unaltered through eBible.org. Text unchanged, used under CC BY-SA 4.0.