A priest offers bread and a cup to a kneeling king beside gathered volunteers and abandoned weapons

भजन संहिता 110

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 110 एक दिव्य रूप से अधिकृत शासक को चित्रित करता है जिसके शत्रु उसके शासन को उलट नहीं सकते। शाही विजय मलिकिसिदक से जुड़े एक स्थायी याजकपद से जुड़ती है, जबकि स्वेच्छुक लोग सुबह की ओस की ताजगी के साथ इकट्ठा होते हैं।
राजपदयाजकपदअधिकारविजय
1मेरे प्रभु से यहोवा की वाणी यह है, “तू मेरे दाहिने ओर बैठ, जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न कर दूँ।” (इब्रा. 10:12,13, लूका 20:42,43)
2तेरे पराक्रम का राजदण्ड यहोवा सिय्योन से बढ़ाएगा। तू अपने शत्रुओं के बीच में शासन कर।
3तेरी प्रजा के लोग तेरे पराक्रम के दिन स्वेच्छाबलि बनते हैं; तेरे जवान लोग पवित्रता से शोभायमान, और भोर के गर्भ से जन्मी हुई ओस के समान तेरे पास हैं।
4यहोवा ने शपथ खाई और न पछताएगा, “तू मलिकिसिदक की रीति पर सर्वदा का याजक है110:4 तू मलिकिसिदक की रीति पर सर्वदा का याजक है: अर्थात् वह मलिकिसिदक के समान पुरोहित था जैसा वह पुरोहित था वैसा ही पुरोहित होगा।।” (इब्रा. 7:21, इब्रा. 7:17)
5प्रभु तेरी दाहिनी ओर होकर अपने क्रोध के दिन राजाओं को चूर कर देगा। (भज. 143:5)
6वह जाति-जाति में न्याय चुकाएगा, रणभूमि शवों से भर जाएगी; वह लम्बे चौड़े देशों के प्रधानों को चूर चूरकर देगा
7वह मार्ग में चलता हुआ नदी का जल पीएगा और तब वह विजय के बाद अपने सिर को ऊँचा करेगा।

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.

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