A father embraces a child as elders receive care and an eagle rises above a fertile valley

भजन संहिता 103

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
भजन 103 संपूर्ण आत्मा को क्षमा, चंगाई, छुड़ाव, करुणा, और नवीनीकृत शक्ति को याद करने के लिए बुलाता है। मानवीय जीवन घास की तरह मुरझा जाता है, फिर भी स्थिर पितृ दया पीढ़ियों में परमेश्वर का भय मानने वालों तक पहुंचती है।
करुणाक्षमानवीनीकरणस्तुति
1हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
2हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
3वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
4वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है: संकट में मृत्यु से बचा लेता है या रोग के कारण मरने से बचाता है।, और तेरे सिर पर करुणा और दया का मुकुट बाँधता है,
5वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिससे तेरी जवानी उकाब के समान नई हो जाती है।
6यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
7उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए। (भज. 147:19)
8यहोवा दयालु और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है (भज. 86:15, भज. 145:8)
9वह सर्वदा वाद-विवाद करता न रहेगा103:9 वह सर्वदा वाद-विवाद करता न रहेगा: झिड़केगा, विरोध करेगा, संघर्ष करेगा। वह मनुष्यों से सदैव संघर्ष नहीं करेगा, अप्रसन्न नहीं होगा।, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
10उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हमको बदला दिया है।
11जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊँचा है, वैसे ही उसकी करुणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
12उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
13जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।
14क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।
15मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है,
16जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
17परन्तु यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग-युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है, (लूका 1:50)
18अर्थात् उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण करके उन पर चलते हैं।
19यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।
20हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन को मानते103:20 उसके वचन को मानते: जो सदैव उसकी वाणी सुनते हैं जो उसकी आज्ञा नहीं टालते। और पूरा करते हो, उसको धन्य कहो!
21हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके सेवकों, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो!
22हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!

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