
अय्यूब 42
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
अय्यूब उत्तर देता है कि उसने ऐसी बातों की चर्चा की जो उसकी समझ से बहुत अद्भुत थीं, कि उसने परमेश्वर के विषय में सुना था परन्तु अब देखता है, और वह धूल व राख में पश्चाताप करता है। परमेश्वर तीनों मित्रों को सही न बोलने के लिए डांटता है, उनकी ओर से अय्यूब की प्रार्थना स्वीकार करता है, और उसका भाग्य दुगना करता है, उसे बच्चों और पोते-पोतियों के बीच लंबा जीवन देते हुए।
नम्रतामध्यस्थतापुनर्स्थापनासमुदाय
1तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया;
2“मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है42:2 मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है: यह परमेश्वर के सर्वशक्तिमान होने का स्वीकरण है और मनुष्य को उसकी अधीनता में रहना है, उसकी असीम शक्ति के अधीन।, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। (यशा. 14:27, नीति. 19:21, मर. 10:27)
3तूने मुझसे पूछा, ‘तू कौन है जो ज्ञानरहित होकर युक्ति पर परदा डालता है?’ परन्तु मैंने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात् जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिनको मैं जानता भी नहीं था।
4तूने मुझसे कहा, ‘मैं निवेदन करता हूँ सुन, मैं कुछ कहूँगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता।’
5मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं;
6इसलिए मुझे अपने ऊपर घृणा आती है42:6 मुझे अपने ऊपर घृणा आती है: मुझे बोध हो गया कि मैं एक घृणित एवं तुच्छ पापी हूँ। यद्यपि अय्यूब ने सिद्ध होने का दावा नहीं किया परन्तु वह अपनी धार्मिकता के विचार से अनावश्यक बड़प्पन दिखा रहा था।, और मैं धूलि और राख में पश्चाताप करता हूँ।”
7और ऐसा हुआ कि जब यहोवा ये बातें अय्यूब से कह चुका, तब उसने तेमानी एलीपज से कहा, “मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही।
8इसलिए अब तुम सात बैल और सात मेढ़े छाँटकर मेरे दास अय्यूब के पास जाकर अपने निमित्त होमबलि चढ़ाओ, तब मेरा दास अय्यूब तुम्हारे लिये प्रार्थना करेगा, क्योंकि उसी की प्रार्थना मैं ग्रहण करूँगा; और नहीं, तो मैं तुम से तुम्हारी मूर्खता के योग्य बर्ताव करूँगा, क्योंकि तुम लोगों ने मेरे विषय मेरे दास अय्यूब की सी ठीक बात नहीं कही।”
9यह सुन तेमानी एलीपज, शूही बिल्दद और नामाती सोपर ने जाकर यहोवा की आज्ञा के अनुसार किया, और यहोवा ने अय्यूब की प्रार्थना ग्रहण की।
10जब अय्यूब ने अपने मित्रों के लिये प्रार्थना की, तब यहोवा ने उसका सारा दुःख दूर किया, और जितना अय्यूब का पहले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया।
11तब उसके सब भाई, और सब बहनें, और जितने पहले उसको जानते-पहचानते थे, उन सभी ने आकर उसके यहाँ उसके संग भोजन किया; और जितनी विपत्ति यहोवा ने उस पर डाली थी, उन सब के विषय उन्होंने विलाप किया, और उसे शान्ति दी; और उसे एक-एक चाँदी का सिक्का और सोने की एक-एक बाली दी।
12और यहोवा ने अय्यूब के बाद के दिनों में उसको पहले के दिनों से अधिक आशीष दी42:12 यहोवा ने अय्यूब के बाद के दिनों में उसको पहले के दिनों से अधिक आशीष दी: उस पर आनेवाली विपत्तियों के पूर्व के दिनों से दो गुणा आशीषें।; और उसके चौदह हजार भेड़-बकरियाँ, छः हजार ऊँट, हजार जोड़ी बैल, और हजार गदहियाँ हो गईं।
13और उसके सात बेटे और तीन बेटियाँ भी उत्पन्न हुईं।
14इनमें से उसने जेठी बेटी का नाम तो यमीमा, दूसरी का कसीआ और तीसरी का केरेन्हप्पूक रखा।
15और उस सारे देश में ऐसी स्त्रियाँ कहीं न थीं, जो अय्यूब की बेटियों के समान सुन्दर हों, और उनके पिता ने उनको उनके भाइयों के संग ही सम्पत्ति दी।
16इसके बाद अय्यूब एक सौ चालीस वर्ष जीवित रहा, और चार पीढ़ी तक अपना वंश देखने पाया।
17अन्त में अय्यूब वृद्धावस्था में दीर्घायु होकर मर गया।
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