Israelites abandoning foreign idols as leaders gather at Mizpah

न्यायियों 10

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
तोला और याईर के इस्राएल का न्याय करने के बाद, लोग फिर अनेक विदेशी देवताओं की सेवा करते हैं और पलिश्ती तथा अम्मोनी दमन के अधीन कष्ट सहते हैं। परमेश्वर उनके बार-बार के विश्वासघात को उजागर करता है, फिर भी उनकी स्वीकृति और मूर्तियों को हटाना उनकी दुर्दशा पर करुणा जगाता है।
मूर्तिपूजादमनपश्चातापकरुणा
1अबीमेलेक के बाद इस्राएल को छुड़ाने के लिये तोला नामक एक इस्साकारी उठा, वह दोदो का पोता और पूआ10:1 तोला नामक एक इस्साकारी उठा, वह दोदो का पोता और पूआ: दोनों इस्साकार भाग में परिवार के मुखिया थे। का पुत्र था; और एप्रैम के पहाड़ी देश के शामीर नगर में रहता था।
2वह तेईस वर्ष तक इस्राएल का न्याय करता रहा। तब मर गया, और उसको शामीर में मिट्टी दी गई।
3उसके बाद गिलादी याईर उठा, वह बाईस वर्ष तक इस्राएल का न्याय करता रहा।
4और उसके तीस पुत्र थे जो गदहियों के तीस बच्चों पर सवार हुआ करते थे; और उनके तीस नगर भी थे जो गिलाद देश में हैं, और आज तक हब्बोत्याईर कहलाते हैं।
5और याईर मर गया, और उसको कामोन में मिट्टी दी गई।
6तब इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया, अर्थात् बाल देवताओं और अश्तोरेत देवियों और अराम, सीदोन, मोआब, अम्मोनियों, और पलिश्तियों के देवताओं की उपासना करने लगे; और यहोवा को त्याग दिया, और उसकी उपासना न की। (भज. 106:36, न्या. 4:1)
7तब यहोवा का क्रोध इस्राएल पर भड़का, और उसने उन्हें पलिश्तियों और अम्मोनियों के अधीन कर दिया,
8और उस वर्ष10:8 उस वर्ष: सम्भवत: अत्याचार का अन्तिम वर्ष जब अम्मोनियों ने यरदन पार की थी। ये इस्राएलियों को सताते और पीसते रहे। वरन् यरदन पार एमोरियों के देश गिलाद में रहनेवाले सब इस्राएलियों पर अठारह वर्ष तक अंधेर करते रहे।
9अम्मोनी यहूदा और बिन्यामीन से और एप्रैम के घराने से लड़ने को यरदन पार जाते थे, यहाँ तक कि इस्राएल बड़े संकट में पड़ गया।
10तब इस्राएलियों ने यह कहकर यहोवा की दुहाई दी, “हमने जो अपने परमेश्वर को त्याग कर बाल देवताओं की उपासना की है, यह हमने तेरे विरुद्ध महापाप किया है।”
11यहोवा ने इस्राएलियों से कहा, “क्या मैंने तुम को मिस्रियों, एमोरियों, अम्मोनियों, और पलिश्तियों के हाथ से न छुड़ाया था?
12फिर जब सीदोनी, और अमालेकी, और माओनी लोगों ने तुम पर अंधेर किया; और तुम ने मेरी दुहाई दी, तब मैंने तुम को उनके हाथ से भी न छुड़ाया? (भज. 106: 42, 43)
13तो भी तुम ने मुझे त्याग कर पराए देवताओं की उपासना की है; इसलिए मैं फिर तुम को न छुड़ाऊँगा।
14जाओ, अपने माने हुए देवताओं की दुहाई दो; तुम्हारे संकट के समय वे ही तुम्हें छुड़ाएँ।” (यिर्म. 2:28, यशा. 10:3)
15इस्राएलियों ने यहोवा से कहा, “हमने पाप किया है; इसलिए जो कुछ तेरी दृष्टि में भला हो वही हम से कर; परन्तु अभी हमें छुड़ा।”
16तब वे पराए देवताओं को अपने मध्य में से दूर करके यहोवा की उपासना करने लगे; और वह इस्राएलियों के कष्ट के कारण खेदित हुआ।
17तब अम्मोनियों ने इकट्ठे होकर गिलाद में अपने डेरे डाले; और इस्राएलियों ने भी इकट्ठे होकर मिस्पा10:17 मिस्पा: अर्थात् चौकसी गढ़, या निगरानी, इससे प्रगट होता है कि वह गिलाद पर्वत पर ऊँचाई में स्थित था और एक दृढ़ चौकी थी। में अपने डेरे डाले।
18तब गिलाद के हाकिम एक दूसरे से कहने लगे, “कौन पुरुष अम्मोनियों से संग्राम आरम्भ करेगा? वही गिलाद के सब निवासियों का प्रधान ठहरेगा।”

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