Jonah addresses Nineveh as its ruler, families, servants, and covered livestock gather throughout the city in fasting and humility

योना 3

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
दूसरी बार बुलाया गया, योना नीनवे की यात्रा करता है और उसके आने वाले उलटफेर की घोषणा करता है। लोग चेतावनी मानते हैं, उपवास की घोषणा करते हैं, और बड़े से छोटे तक टाट पहनते हैं। राजा हिंसा से तत्काल पश्चाताप की आज्ञा देता है, और परमेश्वर नगर के बदले आचरण को देखकर द्रवित होता है।
दूसरी बुलाहटनीनवेपश्चातापदया
1तब यहोवा का यह वचन दूसरी बार योना के पास पहुँचा,
2“उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और जो बात मैं तुझ से कहूँगा, उसका उसमें प्रचार कर।”
3तब योना यहोवा के वचन के अनुसार नीनवे को गया3:3 तब योना यहोवा के वचन के अनुसार नीनवे को गया: पहले वह आज्ञा मानने को तैयार नहीं था परन्तु अब तैयार था।। नीनवे एक बहुत बड़ा नगर था, वह तीन दिन की यात्रा का था।
4और योना ने नगर में प्रवेश करके एक दिन की यात्रा पूरी की, और यह प्रचार करता गया, “अब से चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगा।”
5तब नीनवे के मनुष्यों ने परमेश्वर के वचन पर विश्वास किया; और उपवास का प्रचार किया गया और बड़े से लेकर छोटे तक सभी ने टाट ओढ़ा। (मत्ती 12:41)
6तब यह समाचार नीनवे के राजा के कान में पहुँचा; और उसने सिंहासन पर से उठ, अपना राजकीय ओढ़ना उतारकर टाट ओढ़ लिया, और राख पर बैठ गया।
7राजा ने अपने प्रधानों से सम्मति लेकर नीनवे में इस आज्ञा का ढिंढोरा पिटवाया, “क्या मनुष्य, क्या गाय-बैल, क्या भेड़-बकरी, या और पशु, कोई कुछ भी न खाएँ; वे न खाएँ और न पानी पीएँ।
8और मनुष्य और पशु दोनों टाट ओढ़ें, और वे परमेश्वर की दुहाई चिल्ला चिल्लाकर दें; और अपने कुमार्ग से फिरें; और उस उपद्रव से, जो वे करते हैं, पश्चाताप करें।
9सम्भव है, परमेश्वर दया करे और अपनी इच्छा बदल दे, और उसका भड़का हुआ कोप शान्त हो जाए और हम नाश होने से बच जाएँ।”
10जब परमेश्वर ने उनके कामों को देखा, कि वे कुमार्ग से फिर रहे हैं, तब परमेश्वर ने अपनी इच्छा बदल दी, और उनकी जो हानि करने की ठानी थी, उसको न किया ।

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