Jeremiah reassuring a weary Baruch beside rolled blank scrolls as storm clouds pass over Jerusalem

यिर्मयाह 45

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
बारूक यिर्मयाह के शब्दों को दर्ज करते हुए उठाए गए शोक और थकावट पर विलाप करता है। परमेश्वर उसे याद दिलाता है कि संपूर्ण भूमि उथल-पुथल का सामना करती है, उससे स्वयं के लिए महानता न खोजने को कहता है, और प्रतिज्ञा करता है कि जहां भी वह जाए उसका जीवन सुरक्षित रखा जाएगा।
बारूकनम्रताथकावटसंरक्षण
1योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में, जब नेरिय्याह का पुत्र बारूक यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता से भविष्यद्वाणी के ये वचन सुनकर पुस्तक में लिख चुका था,
2तब उसने उससे यह वचन कहा: “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, तुझ से यह कहता है,
3हे बारूक, तूने कहा, ‘हाय मुझ पर! क्योंकि यहोवा ने मुझे दुःख पर दुःख दिया है; मैं कराहते-कराहते थक गया45:3 मैं कराहते-कराहते थक गया: बारुक यहूदिया देश के पाप के कारण बहुत दु:खी था और परमेश्वर ने भी उसके आनेवाले कठोर दण्ड को प्रगट करके उसका दुःख और बढ़ा दिया। और मुझे कुछ चैन नहीं मिलता।’
4तू इस प्रकार कह, यहोवा यह कहता है: देख, इस सारे देश को जिसे मैंने बनाया था, उसे मैं आप ढा दूँगा, और जिनको मैंने रोपा था, उन्हें स्वयं उखाड़ फेंकूँगा।
5इसलिए सुन, क्या तू अपने लिये बड़ाई खोज रहा है? उसे मत खोज; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि मैं सारे मनुष्यों पर विपत्ति डालूँगा; परन्तु जहाँ कहीं तू जाएगा वहाँ मैं तेरा प्राण बचाकर तुझे जीवित रखूँगा।”

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन — CC BY-SA 4.0. Where these translations come from.

Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Supplied unaltered through eBible.org. Text unchanged, used under CC BY-SA 4.0.