
यशायाह 55
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
हर प्यासे को बिना भुगतान के जल, भोजन, और वाचा दया पाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। परमेश्वर को खोजना क्षमा लाता है, दिव्य विचार मानवीय विचारों से बढ़कर हैं, और प्रभावी वचन छुड़ाए हुओं को आनंदित सृष्टि के माध्यम से घर भेजता है।
अनुग्रहआमंत्रणवचनआनंद
1“अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपये और बिना दाम55:1 बिन रुपये और बिना दाम: ऐसा कोई भी गरीब नहीं होगा कि खरीद न सके, और कोई ऐसा धनवान भी नहीं होगा कि सोने से खरीदे। अगर गरीब या उसे धनवान प्राप्त करे तो वह बिना पैसे या मोल लिए होगा। ही आकर ले लो। (यूह. 7:37, प्रका. 21:6, प्रका. 22:17)
2जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और जिससे पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएँ खाने पाओगे और चिकनी-चिकनी वस्तुएँ खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
3कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बाँधूँगा, अर्थात् दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा। (भज. 89:28, नीति. 4:20, प्रेरि. 13:34)
4सुनो, मैंने उसको राज्य-राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देनेवाला ठहराया है। (इब्रा. 2:10, इब्रा. 5:9, प्रका. 1:5)
5सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियाँ जो तुझे नहीं जानती तेरे पास दौड़ी आएँगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।
6“जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है55:6 जब तक वह निकट है: इसका महत्त्वपूर्ण अर्थ है कि परमेश्वर हर समय हमारे निकट ही रहता है और दर्शाता है कि कुछ समय अन्य समय की तुलना में ऐसे होते हैं जब उसको खोजना अधिक अनुकूल परिस्थिति में हो जाता है। तब तक उसे पुकारो; (प्रेरि. 17:27)
7दुष्ट अपनी चाल चलन और अनर्थकारी अपने सोच-विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।
8क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। (रोम. 11:33)
9क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
10“जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहाँ ऐसे ही लौट नहीं जाते, वरन् भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है, (2 कुरि. 9:10)
11उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा55:11 जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा: मेरी इच्छा पूरी किए बिना वह लौटेगा नहीं।, और जिस काम के लिये मैंने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
12“क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुँचाए जाओगे; तुम्हारे आगे-आगे पहाड़ और पहाड़ियाँ गला खोलकर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएँगे।
13तब भटकटैयों के बदले सनोवर उगेंगे; और बिच्छू पेड़ों के बदले मेंहदी उगेगी; और इससे यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा।”
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