
होशे 3
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
परमेश्वर होशे से कहता है कि वह एक विश्वासहीन स्त्री से फिर प्रेम करे, इस्राएल की मूर्तिपूजा के बावजूद दिव्य प्रेम को प्रतिबिंबित करते हुए। होशे उसे चांदी और जौ से छुड़ाता है और विश्वासयोग्यता की अवधि की मांग करता है, इस्राएल की कमी और अंततः परमेश्वर व दाऊदी शासन की ओर वापसी की प्रत्याशा करते हुए।
छुड़ावस्थिर प्रेमविश्वासयोग्यतावापसी
1फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “अब जाकर एक ऐसी स्त्री से प्रीति कर, जो व्यभिचारिणी होने पर भी अपने प्रिय की प्यारी हो; क्योंकि उसी भाँति यद्यपि इस्राएली पराए देवताओं की ओर फिरे, और किशमिश की टिकियों से प्रीति रखते हैं, तो भी यहोवा उनसे प्रीति रखता है।”
2तब मैंने एक स्त्री को चाँदी के पन्द्रह टुकड़े और डेढ़ होमेर जौ देकर मोल लिया।
3मैंने उससे कहा, “तू बहुत दिन तक मेरे लिये बैठी रहना; और न तो छिनाला करना, और न किसी पुरुष की स्त्री हो जाना; और मैं भी तेरे लिये ऐसा ही रहूँगा।”
4क्योंकि इस्राएली बहुत दिन तक बिना राजा, बिना हाकिम, बिना यज्ञ, बिना स्तम्भ, और बिना एपोद या गृहदेवताओं के बैठे रहेंगे।
5उसके बाद वे अपने परमेश्वर यहोवा और अपने राजा दाऊद को फिर ढूँढ़ने लगेंगे3:5 वे अपने परमेश्वर यहोवा .... फिर ढूँढ़ने लगेंगे: इब्रानी में इस शब्द ढूँढ़ने का अर्थ है यत्न के साथ खोजना जैसे परमेश्वर को, यह धार्मिक खोज का बोध करवाता है।, और अन्त के दिनों में यहोवा के पास, और उसकी उत्तम वस्तुओं के लिये थरथराते हुए आएँगे।
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