Three travelers helping one another carry a burden up a steep rocky path

सभोपदेशक 4

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
उपदेशक बिना सांत्वना के उत्पीड़न, प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित श्रम, और एकाकी संचय की शून्यता पर शोक करता है। संगति सहायता, गर्मजोशी, और रक्षा प्रदान करती है, त्रिगुण रस्सी की तरह। यहां तक कि राजनीतिक सफलता भी अस्थिर सिद्ध होती है जब सार्वजनिक अनुग्रह एक शासक से दूसरे की ओर बदलता है।
उत्पीड़नअकेलापनसंगतिसाझा शक्तिसत्ता
1तब मैंने वह सब अंधेर देखा4:1 तब मैंने वह सब अंधेर देखा: वह अन्य घटनाओं को देखता है और उनके द्वारा अपने पूर्वकालिक निष्कर्षो को जाँचता है। जो सूर्य के नीचे होता है। और क्या देखा, कि अंधेर सहनेवालों के आँसू बह रहे हैं, और उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं! अंधेर करनेवालों के हाथ में शक्ति थी, परन्तु उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं था।
2इसलिए मैंने मरे हुओं को जो मर चुके हैं, उन जीवितों से जो अब तक जीवित हैं अधिक धन्य कहा;
3वरन् उन दोनों से अधिक अच्छा वह है जो अब तक हुआ ही नहीं, न यह बुरे काम देखे जो सूर्य के नीचे होते हैं।
4तब मैंने सब परिश्रम के काम और सब सफल कामों को देखा जो लोग अपने पड़ोसी से जलन के कारण करते हैं4:4 लोग अपने पड़ोसी से जलन के कारण करते हैं: सफलता कार्य करनेवाले को ईर्ष्या का पात्र बना देती है। यह कार्य पड़ोसी के साथ मनुष्य की प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है।। यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।
5मूर्ख छाती पर हाथ रखे रहता और अपना माँस खाता है।
6चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और वायु को पकड़ना हो।
7फिर मैंने सूर्य के नीचे यह भी व्यर्थ बात देखी।
8कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तो भी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आँखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किसके लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूँ? यह भी व्यर्थ और निरा दुःख भरा काम है।
9एक से दो अच्छे हैं4:9 एक से दो अच्छे हैं: साथी के बिना मनुष्य ऐसा है जैसा दाहिने हाथ के बिना बायाँ हाथ।, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है।
10क्योंकि यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो।
11फिर यदि दो जन एक संग सोएँ तो वे गर्म रहेंगे, परन्तु कोई अकेला कैसे गर्म हो सकता है?
12यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका सामना कर सकेंगे। जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती।
13बुद्धिमान लड़का दरिद्र होने पर भी ऐसे बूढ़े और मूर्ख राजा से अधिक उत्तम है जो फिर सम्मति ग्रहण न करे,
14चाहे वह उसके राज्य में धनहीन उत्पन्न हुआ या बन्दीगृह से निकलकर राजा हुआ हो।
15मैंने सब जीवितों को जो सूर्य के नीचे चलते फिरते हैं देखा कि वे उस दूसरे लड़के के संग हो लिये हैं जो उनका स्थान लेने के लिये खड़ा हुआ।
16वे सब लोग अनगिनत थे जिन पर वह प्रधान हुआ था। तो भी भविष्य में होनेवाले लोग उसके कारण आनन्दित न होंगे। निःसन्देह यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।

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