
व्यवस्थाविवरण 23
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
तेईसवाँ अध्याय सभा की सीमाएँ निर्धारित करता है, सैन्य शिविर में स्वच्छता की माँग करता है, भागे हुए सेवकों की रक्षा करता है, मंदिर वेश्यावृत्ति को अस्वीकार करता है, उधार और मन्नतों को नियमित करता है, और भूखे यात्रियों को पड़ोसी के खेत से मामूली रूप से खाने की अनुमति देता है बिना पहुँच को कटाई में बदले।
शिविर की पवित्रतासुरक्षामन्नतेंपड़ोसी की पहुँच
1“जिसके अण्ड कुचले गए या लिंग काट डाला गया हो वह यहोवा की सभा में न आने पाए।
2“कोई कुकर्म से जन्मा हुआ यहोवा की सभा में न आने पाए; किन्तु दस पीढ़ी तक उसके वंश का कोई यहोवा की सभा में न आने पाए।
3“कोई अम्मोनी या मोआबी यहोवा की सभा में न आने पाए; उनकी दसवीं पीढ़ी तक का कोई यहोवा की सभा में कभी न आने पाए;
4इस कारण से कि जब तुम मिस्र से निकलकर आते थे तब उन्होंने अन्न जल लेकर मार्ग में तुम से भेंट नहीं की, और यह भी कि उन्होंने अरम्नहरैम देश के पतोर नगरवाले बोर के पुत्र बिलाम को तुझे श्राप देने के लिये दक्षिणा दी।
5परन्तु तेरे परमेश्वर यहोवा ने बिलाम की न सुनी; किन्तु तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरे निमित्त उसके श्राप को आशीष में बदल दिया, इसलिए कि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से प्रेम रखता था।
6तू जीवन भर उनका कुशल और भलाई कभी न चाहना।
7“किसी एदोमी से घृणा न करना, क्योंकि वह तेरा भाई है; किसी मिस्री से भी घृणा न करना, क्योंकि उसके देश में तू परदेशी होकर रहा था।
8उनके जो परपोते उत्पन्न हों23:8 जो परपोते उत्पन्न हों: एदोमी और मिस्रियों के परपोते। वे यहोवा की सभा में आने पाएँ।
9“जब तू शत्रुओं से लड़ने को जाकर छावनी डाले, तब सब प्रकार की बुरी बातों से बचे रहना।
10यदि तेरे बीच कोई पुरुष उस अशुद्धता से जो रात्रि को आप से आप हुआ करती है अशुद्ध हुआ हो, तो वह छावनी से बाहर जाए, और छावनी के भीतर न आए;
11परन्तु संध्या से कुछ पहले वह स्नान करे, और जब सूर्य डूब जाए तब छावनी में आए।
12“छावनी के बाहर शौच-स्थान बनाना, और शौच के लिए वहीं जाया करना;
13और तेरे पास के हथियारों में एक खनती भी रहे; और जब तू दिशा फिरने को बैठे, तब उससे खोदकर अपने मल को ढाँप देना।
14क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझको बचाने और तेरे शत्रुओं को तुझ से हरवाने को तेरी छावनी के मध्य घूमता रहेगा, इसलिए तेरी छावनी पवित्र रहनी चाहिये, ऐसा न हो कि वह तेरे मध्य में कोई अशुद्ध वस्तु देखकर तुझ से फिर जाए।
15“जो दास अपने स्वामी के पास से भागकर तेरी शरण ले23:15 जो दास अपने स्वामी के पास से भागकर तेरी शरण ले: अन्यजाति स्वामी के पास से भागकर उनके देश में आ जाए। निश्चय ही वह शरणार्थी दण्ड से भागकर नहीं परन्तु अपने स्वामी के अत्याचार से बचकर भागा है। उसको उसके स्वामी के हाथ न पकड़ा देना;
16वह तेरे बीच जो नगर उसे अच्छा लगे उसी में तेरे संग रहने पाए; और तू उस पर अत्याचार न करना।
17“इस्राएली स्त्रियों में से कोई देवदासी न हो23:17 कोई देवदासी न हो: मूर्तिपूजक जातियों में वैश्यावृति धार्मिक अनुष्ठान थी विशेष करके अश्तारोत की उपासना में।, और न इस्राएलियों में से कोई पुरुष ऐसा बुरा काम करनेवाला हो।
18तू वेश्यापन की कमाई या कुत्ते की कमाई किसी मन्नत को पूरी करने के लिये अपने परमेश्वर यहोवा के घर में न लाना; क्योंकि तेरे परमेश्वर यहोवा के समीप ये दोनों की दोनों कमाई घृणित कर्म है।
19“अपने किसी भाई को ब्याज पर ऋण न देना, चाहे रुपया हो, चाहे भोजनवस्तु हो, चाहे कोई वस्तु हो जो ब्याज पर दी जाती है, उसे ब्याज पर न देना।
20तू परदेशी को ब्याज पर ऋण तो दे, परन्तु अपने किसी भाई से ऐसा न करना, ताकि जिस देश का अधिकारी होने को तू जा रहा है, वहाँ जिस-जिस काम में अपना हाथ लगाए, उन सभी में तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे आशीष दे।
21“जब तू अपने परमेश्वर यहोवा के लिये मन्नत माने, तो उसे पूरी करने में विलम्ब न करना; क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा उसे निश्चय तुझ से ले लेगा, और विलम्ब करने से तू पापी ठहरेगा। (मत्ती 5:33)
22परन्तु यदि तू मन्नत न माने, तो तेरा कोई पाप नहीं।
23जो कुछ तेरे मुँह से निकले उसके पूरा करने में चौकसी करना; तू अपने मुँह से वचन देकर अपनी इच्छा से अपने परमेश्वर यहोवा की जैसी मन्नत माने, वैसा ही स्वतंत्रता पूर्वक उसे पूरा करना।
24“जब तू किसी दूसरे की दाख की बारी में जाए, तब पेट भर मनमाने दाख खा तो खा, परन्तु अपने पात्र में कुछ न रखना।
25और जब तू किसी दूसरे के खड़े खेत में जाए, तब तू हाथ से बालें तोड़ सकता है, परन्तु किसी दूसरे के खड़े खेत पर हँसुआ न लगाना। (मत्ती 12:1)
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