David, Zadok, and priestly families drawing lots before the ark’s fabric tent

1 इतिहास 24

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
अध्याय सारांश
हारून के वंशज सादोक और अहीमेलेक के अधीन चौबीस याजकीय समूहों में विभाजित हैं। चिट्ठियां बिना पक्षपात के बारी निर्धारित करती हैं, जबकि शेष लेवीय परिवार भी यरूशलेम में भविष्य की मंदिर सेवा के लिए दर्ज हैं।
याजकव्यवस्थानिष्पक्षतासेवा
1फिर हारून की सन्तान के दल ये थे। हारून के पुत्र तो नादाब, अबीहू, एलीआजर और ईतामार थे।
2परन्तु नादाब और अबीहू अपने पिता के सामने पुत्रहीन मर गए, इसलिए याजक का काम एलीआजर और ईतामार करते थे।
3और दाऊद ने एलीआजर के वंश के सादोक और ईतामार के वंश के अहीमेलेक की सहायता से24:3 सादोक और ईतामार के वंश के अहीमेलेक की सहायता से: सादोक और अहीमेलेक ने पुरोहितीयदायित्वों को तैयार करने में दाऊद की सहायता की थी, जिस प्रकार के दलों के प्रधानों ने गायकों को दलों में बाँटने में उसकी सहायता की थी। उनको अपनी-अपनी सेवा के अनुसार दल-दल करके बाँट दिया।
4एलीआजर के वंश के मुख्य पुरुष, ईतामार के वंश के मुख्य पुरुषों से अधिक थे, और वे ऐसे बाँटे गए: अर्थात् एलीआजर के वंश के पितरों के घरानों के सोलह, और ईतामार के वंश के पितरों के घरानों के आठ मुख्य पुरुष थे।
5तब वे चिट्ठी डालकर बराबर-बराबर बाँटे गए, क्योंकि एलीआजर और ईतामार दोनों के वंशों में पवित्रस्थान के हाकिम और परमेश्वर के हाकिम नियुक्त हुए थे।
6और नतनेल के पुत्र शमायाह जो शास्त्री और लेवीय था, उनके नाम राजा और हाकिमों और सादोक याजक, और एब्यातार के पुत्र अहीमेलेक और याजकों और लेवियों के पितरों के घरानों के मुख्य पुरुषों के सामने लिखे24:6 उनके नाम .... लिखे: चिट्ठियाँ निकालकर उनके नाम लिखे।; अर्थात् पितरों का एक घराना तो एलीआजर के वंश में से और एक ईतामार के वंश में से लिया गया।
7पहली चिट्ठी तो यहोयारीब के, और दूसरी यदायाह,
8तीसरी हारीम के, चौथी सोरीम के,
9पाँचवीं मल्किय्याह के, छठवीं मिय्यामीन के,
10सातवीं हक्कोस के, आठवीं अबिय्याह के, (लूका 1:5)
11नौवीं येशुअ के, दसवीं शकन्याह के,
12ग्यारहवीं एल्याशीब के, बारहवीं याकीम के,
13तेरहवीं हुप्पा के, चौदहवीं येसेबाब के,
14पन्द्रहवीं बिल्गा के, सोलहवीं इम्मेर के,
15सत्रहवीं हेजीर के, अठारहवीं हप्पित्सेस के,
16उन्‍नीसवीं पतह्याह के, बीसवीं यहेजकेल के,
17इक्कीसवीं याकीन के, बाईसवीं गामूल के,
18तेईसवीं दलायाह के, और चौबीसवीं माज्याह के नाम पर निकलीं।
19उनकी सेवकाई के लिये उनका यही नियम ठहराया गया कि वे अपने उस नियम के अनुसार जो इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार उनके मूलपुरुष हारून ने चलाया था, यहोवा के भवन में जाया करें।
20बचे हुए लेवियों में से अम्राम के वंश में से शूबाएल, शूबाएल के वंश में से येहदयाह।
21बचा रहब्याह, अतः रहब्याह, के वंश में से यिश्शिय्याह मुख्य था।
22यिसहारियों में से शलोमोत और शलोमोत के वंश में से यहत।
23हेब्रोन के वंश में से मुख्य तो यरिय्याह, दूसरा अमर्याह, तीसरा यहजीएल, और चौथा यकमाम।
24उज्जीएल के वंश में से मीका और मीका के वंश में से शामीर।
25मीका का भाई यिश्शिय्याह, यिश्शिय्याह के वंश में से जकर्याह।
26मरारी के पुत्र महली और मूशी और याजिय्याह का पुत्र बिनो था।
27मरारी के पुत्र: याजिय्याह से बिनो और शोहम, जक्कूर और इब्री थे।
28महली से, एलीआजर जिसके कोई पुत्र न था।
29कीश से कीश के वंश में यरहमेल।
30और मूशी के पुत्र, महली, एदेर और यरीमोत। अपने-अपने पितरों के घरानों के अनुसार ये ही लेवीय सन्तान के थे।
31इन्होंने भी अपने भाई हारून की सन्तानों की तरह दाऊद राजा और सादोक और अहीमेलेक और याजकों और लेवियों के पितरों के घरानों के मुख्य पुरुषों के सामने चिट्ठियाँ डालीं, अर्थात् मुख्य पुरुष के पितरों का घराना उसके छोटे भाई के पितरों के घराने के बराबर ठहरा24:31 मुख्य पुरुष के पितरों का घराना उसके छोटे भाई के पितरों के घराने के बराबर ठहरा: अर्थात् समस्त लेवीय परिवारों की गणना चिट्ठियों के द्वारा बराबर शर्तों पर की गई कि वे क्या सेवा करेंगे। मुख्य पुरुषों के घरानों को छोटे भाई के घरानों से अधिक कुछ लाभ नहीं था।।

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